ऐ सरज़मीने इलाहाबाद
तुझसे दूर होकर
हम दिन गुजारते हैं
तन्हाइयों में रोकर
कैसे कहें हमारे लिए
तू क्या है इलाहाबाद
बसता है दिल जहाँ
वो जगह है इलाहाबाद
हम तुझसे आशना थे
वो वक्त और था
हम भी थे इलाहाबादी
क्या खूब दौर था
शहरे वफ़ा तुझसे मेरी
पहचान है पुरानी
रौशन तेरे बाज़ार या
गलियाँ हों जाफरानी
मुसलमाँ जहाँ होली में
चेहरों को रंगे रहते
हिंदू भी मुहर्रम में
थे मर्सिया कहते
गुस्से में भी जुबां से
आप निकलता था
रस्ता बताने वाला
साथ में चलता था
जिसको न दे मौला
उस पर भी इनायत
मशहूर है अजदाद ने
छोड़ी नही गैरत
शेरो-सुखन से लोग
बातों की पहल करते
महफिल में बुला कर
क्या खूब चुहल करते
पतंगों से आसमान की
जागीर झटकते थे
वो ढील छोड़ देते
हम गद्दा पटकते थे
मकबूल बहुत है
कबाब जहाँ का
बेमिसाल आज भी
शबाब जहाँ का
हमको है याद आती
तेरी शाम अब भी
रौशन है ज़हनो दिल में
तेरा नाम अब भी
गर्दिशे हालात से
मजबूर हो गए
न चाहते हुए भी
तुझसे दूर हो गए.....
Wednesday, November 11, 2009
Sunday, November 1, 2009
मेरे दोस्तों के लिए मेरी तरफ़ से शुभकामनायें
उगते सूरज की किरणें
खुश्बू महके फूलों की
शोहरत उस चाँद की
मस्ती सावन के झूलों की
आपकी हर खुशी हो ऐसी
आपकी हर हँसी हो ऐसी
कस्में नयी, वादे नये
मंज़िल नयी, नये रास्ते
बुलंदिया हैं कर रहीं
इंतेज़ार आपके वास्ते
अपनी महकी खुशियाँ भी
आपको मिले ज़िंदगी नयी
जीवन के अनमोल लम्हे
सपनों की कुछ आहटे
हर कदम पर आपके
खिलती रहे मुस्कराहटें
दिल रहे हमेशा कुछ चहका सा
जीवन हो खुशी से महका सा
दुआ लब पर
आप हंसे हमेशा खिले फूल बन कर
खुश्बू महके फूलों की
शोहरत उस चाँद की
मस्ती सावन के झूलों की
आपकी हर खुशी हो ऐसी
आपकी हर हँसी हो ऐसी
कस्में नयी, वादे नये
मंज़िल नयी, नये रास्ते
बुलंदिया हैं कर रहीं
इंतेज़ार आपके वास्ते
अपनी महकी खुशियाँ भी
आपको मिले ज़िंदगी नयी
जीवन के अनमोल लम्हे
सपनों की कुछ आहटे
हर कदम पर आपके
खिलती रहे मुस्कराहटें
दिल रहे हमेशा कुछ चहका सा
जीवन हो खुशी से महका सा
दुआ लब पर
आप हंसे हमेशा खिले फूल बन कर
..क्यों होता है...
..क्यों होता है................
हर हंसी का अंत मायूसी क्यों होता है,
हर महफिल का अंत तन्हाई क्यों होता है,
क्यों टूट जाते हैं रिश्ते छोटी-छोटी बातों पर,
वक़्त के साथ मानव बदलाव क्यों होता है,
जिस बारे में हम सोचना ही नहीं चाहते,
वो हमारे दिल में क्यों होता है,
दुनिया में सभी कुछ है जो अच्छा होता है,
फिर हमारे ही साथ कुछ अलग क्यों होता है,
हर बात मैं आने लगती हैं बंदिशें,
कभी-कभी बढ़ जाती हैं रंजिशें,
किसी काम को करने से पहले मन मैं इतना सारा तनाव क्यों होता है,
किसी की बेवफाई से दिल ज़ख्मी क्यों होता है,
हम किसी को कभी पसंद करने लगते हैं,
उसी के बारे में अक्सर सोचने लगते हैं,
हम तो उन्हें चाहने लगते हैं लेकिन,
उनके दिल में हमारे लिए नफरत क्यों होती है,
कहीं-कहनी दोस्तों में बुरा हाल होता है,
हर दोस्ती का अंत रुसवाई से क्यों होता है,
हर हंसी का अंत मायूसी क्यों होता है,
हर महफिल का अंत तन्हाई क्यों होता है,
क्यों टूट जाते हैं रिश्ते छोटी-छोटी बातों पर,
वक़्त के साथ मानव बदलाव क्यों होता है,
जिस बारे में हम सोचना ही नहीं चाहते,
वो हमारे दिल में क्यों होता है,
दुनिया में सभी कुछ है जो अच्छा होता है,
फिर हमारे ही साथ कुछ अलग क्यों होता है,
हर बात मैं आने लगती हैं बंदिशें,
कभी-कभी बढ़ जाती हैं रंजिशें,
किसी काम को करने से पहले मन मैं इतना सारा तनाव क्यों होता है,
किसी की बेवफाई से दिल ज़ख्मी क्यों होता है,
हम किसी को कभी पसंद करने लगते हैं,
उसी के बारे में अक्सर सोचने लगते हैं,
हम तो उन्हें चाहने लगते हैं लेकिन,
उनके दिल में हमारे लिए नफरत क्यों होती है,
कहीं-कहनी दोस्तों में बुरा हाल होता है,
हर दोस्ती का अंत रुसवाई से क्यों होता है,
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